2005 में बच्चे की मौत के मामले में मिली थी उम्रकैद; FIR और गवाहों के बयान में देरी, IO की गवाही नहीं होने पर अभियोजन का केस कमजोर माना
खगड़िया/पटना। खगड़िया के वर्ष 2005 के हत्या मामले में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुसहरू साहनी की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अभियोजन के साक्ष्यों और जांच की प्रक्रिया में कई अहम कमियां पाईं। फैसला 5 अक्टूबर 2026 को Musahru Sahni vs State of Bihar, Criminal Appeal (DB) No. 185 of 2008 में सुनाया गया।
पहले जानिए पूरा मामला
रिकॉर्ड के अनुसार, 28 जून 2005 की शाम करीब 6 बजे एक बच्चा लापता हुआ था। बाद में उसका शव खेत के पास मिला। इसके बाद 29 जून की सुबह 8:15 बजे FIR दर्ज हुई। FIR में मृतक के पिता ने अज्ञात लोगों पर हत्या का आरोप लगाया था। बाद की जांच में अभियोजन ने मुसहरू साहनी पर बच्चे को ले जाते देखने और ग्रामीणों द्वारा पकड़े जाने के बाद कथित स्वीकारोक्ति का आरोप लगाया।
गवाहों के बयान पर कोर्ट ने उठाए सवाल
हाईकोर्ट के सामने सबसे अहम मुद्दों में गवाहों के बयान दर्ज करने में हुई देरी रही। रिकॉर्ड के मुताबिक एक कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान घटना के करीब 12 दिन बाद, 12 जुलाई 2005 को दर्ज हुआ। वहीं अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान 22 अगस्त 2005 को दर्ज किए गए। कोर्ट ने इन देरी के संतोषजनक स्पष्टीकरण के अभाव को महत्वपूर्ण माना।
जांच अधिकारी की गवाही भी नहीं हुई
मामले में Investigating Officer (IO) को बतौर गवाह पेश नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल IO की गवाही न होना अपने आप में हर मामले में दोषसिद्धि खत्म करने का आधार नहीं है। लेकिन जब जांच में दूसरी महत्वपूर्ण कमियां भी हों, तो यह कमी अभियोजन के मामले को प्रभावित कर सकती है।
2008 में मिली थी उम्रकैद
ट्रायल कोर्ट ने 14 जनवरी 2008 को मुसहरू साहनी को दोषी ठहराया था। इसके बाद 16 जनवरी 2008 को सजा सुनाई गई, जिसमें IPC की धारा 302 के तहत उम्रकैद और धारा 201 के तहत चार वर्ष की सजा शामिल थी। हाईकोर्ट ने अब दोनों आदेशों को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट का निष्कर्ष
कोर्ट ने FIR में देरी, गवाहों के बयान में देरी, प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य के अभाव और IO की गवाही नहीं होने को पूरे मामले के संदर्भ में देखा। कोर्ट के अनुसार इन परिस्थितियों में अभियोजन का मामला आवश्यक कानूनी मानक पर टिक नहीं पाया। इसके बाद अपील स्वीकार करते हुए मुसहरू साहनी को बरी कर दिया गया और उन्हें बेल बॉन्ड से मुक्त करने का आदेश दिया गया।
2010 से जमानत पर थे
हाईकोर्ट के फैसले में दर्ज है कि मुसहरू साहनी 24 फरवरी 2010 से जमानत पर थे। अब दोषसिद्धि और सजा रद्द होने के बाद उन्हें बेल बॉन्ड से मुक्त कर दिया गया।
NB18 के महत्वपूर्ण पॉइंटर
28 जून 2005: बच्चा लापता हुआ
29 जून: सुबह 8:15 बजे FIR
14 जनवरी 2008: ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराया
16 जनवरी 2008: उम्रकैद की सजा
24 फरवरी 2010: आरोपी जमानत पर आया
5 अक्टूबर 2026: पटना हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि रद्द कर बरी किया

