मिलावट की आशंका के बीच बाजार में धड़ल्ले से मिठाई की बिक्री, सवाल—खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब तक कितने सैंपल लिए? कितनों की जांच हुई और कितनों पर कार्रवाई?
खगड़िया। मिठाई की दुकानें सजी हैं, ग्राहक खरीदारी कर रहे हैं और कारोबार तेजी से चल रहा है। लेकिन इसी बाजार के बीच एक सवाल लगातार खड़ा हो रहा है—लोग जो मिठाई पैसे देकर खरीद रहे हैं, उसकी गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?
खगड़िया में मिठाइयों में मिलावट की आशंका को लेकर चर्चा है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी और सैंपलिंग को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं दिखती। ऐसे में सवाल सीधे विभाग की कार्यशैली पर है।
मुद्दा किसी एक दुकान या दुकानदार को मिलावटी बताने का नहीं है। मुद्दा यह है कि जांच होगी तो सच सामने आएगा।
मुनाफा बड़ा या जनता की सेहत?
दूध, खोया, पनीर, घी और इनसे तैयार मिठाइयां बड़ी संख्या में बिकती हैं। इन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता केवल देखकर तय नहीं की जा सकती। इसके लिए अधिकृत तरीके से नमूना लेकर वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
FSSAI के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियमित रूप से खाद्य कारोबारियों के परिसरों का ऑडिट कर सकते हैं और खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सैंपलिंग की व्यवस्था है। उपभोक्ता भी खाद्य सुरक्षा विभाग के माध्यम से उत्पाद की जांच की शिकायत कर सकते हैं।
FSSAI ने खाद्य पदार्थों के नमूना और विश्लेषण के लिए निर्धारित मैनुअल भी जारी किए हैं, जिनमें मिठाई एवं कन्फेक्शनरी तथा डेयरी उत्पादों के लिए जांच पद्धतियां शामिल हैं।
अब खाद्य विभाग से हिसाब मांगने का समय
खगड़िया में खाद्य सुरक्षा विभाग को साफ-साफ बताना चाहिए
▶ पिछले एक साल में मिठाई दुकानों से कितने सैंपल लिए गए?
▶ कितने सैंपल प्रयोगशाला भेजे गए?
▶ कितने नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए और कितने नहीं?
▶ मानक से बाहर पाए गए नमूनों पर क्या कार्रवाई हुई?
▶ क्या शहर के बड़े और नामी मिठाई प्रतिष्ठानों से भी नियमित सैंपल लिए जाते हैं?
▶ आखिरी बार खगड़िया शहर में व्यापक मिठाई जांच अभियान कब चला था?
ये सवाल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का मकसद केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नियमित निगरानी के जरिए उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
नामी दुकान है तो जांच से परहेज क्यों?
बाजार में किसी दुकान की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण नहीं हो सकती कि वहां बिकने वाला हर खाद्य उत्पाद मानकों के अनुरूप ही है। इसी तरह किसी छोटे दुकानदार को भी केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।
इसलिए रास्ता एक ही है—समान नियम, समान जांच और वैज्ञानिक रिपोर्ट।
बड़े प्रतिष्ठान हों या छोटी दुकानें, विभाग को सभी जगह से नमूने लेकर जांच करानी चाहिए। यदि रिपोर्ट सही आती है तो संबंधित दुकानदार की प्रतिष्ठा और मजबूत होगी। अगर गड़बड़ी मिलती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
छापेमारी की फोटो नहीं, जांच की रिपोर्ट चाहिए
खाद्य सुरक्षा के नाम पर सिर्फ निरीक्षण और छापेमारी की तस्वीरें पर्याप्त नहीं हैं। जनता को यह जानने का अधिकार है कि जांच के बाद परिणाम क्या निकला।
FSSAI की व्यवस्था में खाद्य नमूनों के परीक्षण और विश्लेषण के लिए निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है।
इसलिए खगड़िया में भी जरूरत है कि विभाग सैंपलिंग करे, जांच कराए और परिणाम के आधार पर कार्रवाई करे।
सवाल अब जनता का है और जवाब विभाग को देना होगा
मिठाई त्योहार की खुशी का हिस्सा है, लेकिन खुशी के नाम पर स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता।
अगर खगड़िया की मिठाइयां मानकों के अनुरूप हैं तो खाद्य विभाग जांच कराकर यह भरोसा जनता को दे। और यदि कहीं मिलावट या गुणवत्ता संबंधी गंभीर कमी सामने आती है तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो।
खामोशी से संदेह दूर नहीं होगा—जांच से होगा।
अब देखना यह है कि खगड़िया का खाद्य सुरक्षा विभाग बाजार में उतरकर सैंपलिंग करता है या फिर मिठाई के इस पूरे कारोबार पर सवाल उठते रहने देता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ मिठाई का नहीं है—सवाल खगड़िया के हजारों परिवारों की सेहत का है।

