खगड़िया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार, 2 अक्टूबर को बापू नगर बलुआही स्थित गांधी पार्क में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। गांधी पार्क के अध्यक्ष महेश्वर प्रसाद सिंह, सचिव सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव, सदस्य इंजीनियर नंदन यादव, आमिर खान, ऋतुराज सिंह उर्फ शम्मी, राजद नेता रौशन कुमार तथा बापू मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक चंद्रमणि मिश्र ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि के बाद बापू मध्य विद्यालय के बच्चों और उपस्थित लोगों ने गांधीजी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ का सामूहिक गायन किया। इस दौरान लोगों ने गांधीजी के सत्य, अहिंसा, प्रेम, सद्भाव और स्वच्छता के संदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सर्वधर्म समभाव का संदेश देता है गांधीजी का प्रिय भजन
गांधी पार्क के सचिव सह राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने कहा कि गांधीजी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ में सर्वधर्म समभाव का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को अपना हथियार बनाकर देश को स्वतंत्रता के मार्ग पर आगे बढ़ाया। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सम्मान, अधिकार और कल्याण को उन्होंने राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखा।
उन्होंने कहा कि गांधीजी के विचारों को केवल जयंती के दिन याद करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारा, गरीबों और वंचितों की सेवा तथा लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है।
स्वच्छता को बताया हर नागरिक की जिम्मेदारी
मनोहर कुमार यादव ने कहा कि गांधीजी ने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाते हुए स्वयं सफाई का कार्य किया। उनका संदेश था कि कोई काम छोटा या गंदा नहीं होता। स्वच्छता केवल सरकार या सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
गांधी पार्क के अध्यक्ष महेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि गांधी जयंती पर सभी को सत्य, अहिंसा, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को मजबूत करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “गांधी जी के विचार केवल इतिहास नहीं, बल्कि बेहतर समाज और बेहतर भारत के निर्माण का मार्गदर्शन हैं।”
बापू मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक चंद्रमणि मिश्र ने कहा कि गांधीजी लोगों को हमेशा अपने गांव, घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करते थे। स्वच्छता से स्वस्थ समाज का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी के स्वच्छता संबंधी विचारों में बाहरी साफ-सफाई के साथ-साथ विचारों की पवित्रता, आंतरिक अनुशासन और मानसिक स्वच्छता भी शामिल थी।

