CCSU बिहार की पहल: साइबर फ्रॉड, फेक न्यूज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए तकनीकी समाधान विकसित करेंगे कॉलेज के विद्यार्थी; 26 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन का मौका
पटना | NB18 ब्यूरो
बिहार में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU), बिहार, पटना की ओर से ऑनलाइन साइबर हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ किया गया। 12 अक्टूबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार के पुलिस महानिदेशक, अभियान ने किया। इस पहल के जरिए कॉलेज के विद्यार्थियों को साइबर अपराध से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए नए तकनीकी विचार और प्रभावी डिजिटल समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में CCSU बिहार के पुलिस महानिरीक्षक रंजीत कुमार मिश्रा, पुलिस उपमहानिरीक्षक अवकाश कुमार, साइबर पुलिस अधीक्षक चन्द्र प्रकाश और सी-डैक, पटना के निदेशक अभिनव दीक्षित शामिल हुए।
पांच प्रमुख चुनौतियों पर काम करेंगे प्रतिभागी
ऑनलाइन साइबर हैकाथॉन के तहत साइबर सुरक्षा से जुड़े पांच प्रमुख समस्या क्षेत्रों को शामिल किया गया है। प्रतिभागियों को इन चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीकी मॉडल और डिजिटल टूल विकसित करने होंगे।
इनमें वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की पहचान, एंड्रॉयड एप्लीकेशन की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं का पता लगाना, जन शिकायतों का विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों की प्रामाणिकता का सत्यापन शामिल है।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों की तकनीकी प्रतिभा का उपयोग साइबर अपराध नियंत्रण में करना और पुलिस की डिजिटल जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाले नवाचारों को प्रोत्साहित करना है।
विजेताओं को मिलेंगे डेढ़ लाख रुपये तक के पुरस्कार
साइबर हैकाथॉन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए तीन पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं।
– प्रथम पुरस्कार: 1,50,000 रुपये
– द्वितीय पुरस्कार: 1,00,000 रुपये
– तृतीय पुरस्कार: 50,000 रुपये
26 अक्टूबर तक कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन
साइबर हैकाथॉन-2026 में प्रतिभागियों के निबंधन और समाधान जमा करने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, विजेताओं की घोषणा 28 नवंबर 2026 को की जाएगी।
हैकाथॉन की पात्रता, दिशा-निर्देश, समस्या क्षेत्रों और पंजीकरण से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक वेबसाइट https://cyberhackathon.bihar.gov.in पर उपलब्ध है।
बिहार में साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती के बीच यह पहल विद्यार्थियों को तकनीकी नवाचार से जोड़ने और साइबर सुरक्षा के व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
