50 बीघा से अधिक जमीन पर हो रही खेती, पूर्णिया मंडी के भरोसे किसान; सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग
रितेश कुमार / गोगरी/परबत्ता
मखाना की खेती में दिन-रात मेहनत कर रहे किसानों की चिंता अब बढ़ने लगी है। खेतों में उपज तैयार है, लेकिन स्थानीय बाजार की कमी, कुशल मजदूरों की अनुपलब्धता और कीमतों में गिरावट से किसान परेशान हैं। शुरुआती दौर में 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला मखाने की गुड़िया का भाव अब करीब 12 हजार रुपये रह गया है। ऐसे में किसानों की आमदनी पर असर पड़ने की चिंता सताने लगी है।
गोगरी प्रखंड की कोयला पंचायत के पिपरपांती गांव स्थित सर्किल नंबर एक के धर्मस्थान बहियार में इन दिनों किसान मखाना तैयार करने में जुटे हैं। इलाके में बड़े पैमाने पर मखाने की खेती की जा रही है। यह खेती ग्रामीण किसानों के लिए रोजगार और आमदनी का महत्वपूर्ण साधन बन रही है, लेकिन बाजार और मजदूरों की कमी उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है।
50 बीघा से अधिक जमीन पर मखाने की खेती
जानकारी के अनुसार, दो दर्जन से अधिक किसान अपनी निजी जमीन पर करीब 50 बीघा में मखाने की खेती कर रहे हैं। वहीं, एक दर्जन से अधिक किसान जमीन लीज पर लेकर इसकी खेती में जुटे हैं।
किसान राजेश दास और विपिन दास ने बताया कि प्रति एकड़ करीब दो क्विंटल मखाने का उत्पादन हुआ है। इसके बावजूद उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
पूर्णिया मंडी में गिरा मखाने का भाव
स्थानीय बाजार की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों को मखाना बेचने के लिए पूर्णिया मंडी जाना पड़ता है। किसानों के मुताबिक, मखाने की गुड़िया का भाव पहले करीब 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब घटकर लगभग 12 हजार रुपये रह गया है।
कीमत में प्रति क्विंटल करीब छह हजार रुपये की गिरावट से किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, तैयार मखाना करीब 500 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।
कटिहार से बुलाने पड़ते हैं कुशल मजदूर
मखाने की खेती से लेकर उसे तैयार करने तक विशेष कौशल और मेहनत की जरूरत होती है। स्थानीय स्तर पर कुशल मजदूर नहीं मिलने के कारण किसानों को कटिहार जिले से प्रशिक्षित मजदूर बुलाने पड़ते हैं। इससे खेती की लागत बढ़ जाती है।
किसानों का कहना है कि एक ओर मजदूरी और उत्पादन पर खर्च बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर बाजार में उचित कीमत नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति में खेती से बेहतर आमदनी हासिल करना चुनौती बनता जा रहा है।
सरकारी योजनाओं का लाभ देने की मांग
किसानों ने कहा कि मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने स्थानीय बाजार की व्यवस्था करने, उपज का उचित मूल्य दिलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों की मांग है कि क्षेत्र में मखाना बिक्री की बेहतर व्यवस्था हो, स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर कुशल मजदूर तैयार किए जाएं और सरकारी सहायता का लाभ वास्तविक उत्पादकों तक पहुंचे। इससे किसानों की लागत कम करने और मखाना खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।
