गुरुवार दोपहर आंधी के साथ मूसलाधार बारिश ने खगड़िया में किसानों को भारी नुकसान दिया है। जिले भर में सैकड़ों एकड़ में लगी मक्के की फसल आंधी और बारिश में पूरी तरह जमींदोज हुआ है। जिसके बाद किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि खगड़िया जिला मक्के के उत्पादन में देश के चुनिंदा जिले में आता है। जहां से प्रत्येक वर्ष करीब करीब 55 हजार हेक्टेयर में मक्के की फसल को किसान लगाते हैं। गौरतलब है कि यहां यहां किसान प्रति एकड़ 50 क्विंटल तक मक्का का उत्पादन करते हैं। जो एशिया में सबसे बड़ा उत्पादन बताया जाता है।
1 एकड़ की खेती में 16 हजार तक लगती है लागत
किसानाें के अनुसार 1 एकड़ मक्के की खेती में डीजल पंप सेट से 4 से 5 बार सिंचाई करनी पड़ती है। महंगे खाद व बीज में तकरीबन 15 से 16 हजार तक की लागत आती है। फसल बर्बाद होने से लागत भी नहीं निकल पाता है। क्षेत्र के अधिकांश किसान साहुकार से कर्ज लेकर खेती करते हैं तथा फसल बर्बाद होने से कर्ज लौटाने में वे असमर्थ हो जाते है।

किसान संघ ने की मुआवजे की मांग
बिहार किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह टुडू ने बताया है कि मक्के की फसल मई के अंतिम सप्ताह में तैयार होता है और यह सिलसिला जून तक चलता रहता है। ऐसे में अबतक दस प्रतिशत किसानों का भी मक्का फसल तैयार नहीं हुआ था। इस बीच मई के प्रथम सप्ताह में तूफान और वर्षा ने खेतों में खड़ी मक्का की फसल को जमीनदोज कर दिया है। उन्होंने जिला प्रशासन से किसानों को मुआवजे दिए जाने की मांग की है।


