SIR को लेकर जताया विरोध, चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठाए सवाल; CEC की गिरफ्तारी और SIR पर रोक की मांग
खगड़िया। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शनिवार को खगड़िया में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा तथा चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग को लेकर प्रतिरोध मार्च निकाला गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया।
मार्च CPI(M) के जिला कार्यालय से शुरू होकर बीएसएनएल कार्यालय तक गया और वहां से लौटकर हॉस्पिटल चौक पहुंचा। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CPI(M) राज्य सचिवमंडल सदस्य एवं पूर्व खगड़िया लोकसभा प्रत्याशी संजय कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल मतदान कराने तक सीमित नहीं है। स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शी मतदाता सूची, सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर और संवैधानिक संस्था के रूप में निष्पक्षता बनाए रखना भी आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
SIR को लेकर CPI(M) ने उठाए सवाल
संजय कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और इससे मताधिकार को लेकर गंभीर सवाल पैदा हुए।
CPI(M) नेता ने पश्चिम बंगाल और गोवा में भी SIR से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के आधार, तकनीकी व्यवस्था तथा शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की।
हाल में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, Form-6, चुनावी डेटा तक पहुंच और SIR से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।
चुनाव आयोग ने कहा- मतभेद प्रक्रिया का हिस्सा
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और महत्वपूर्ण फैसले पूर्ण आयोग द्वारा लिए गए हैं।
10 करोड़ नाम हटने के दावे पर भी बहस
संजय कुमार ने देशभर में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए पुराने मतदाता सूची से नाम दोबारा जोड़ने की मांग की। हालांकि, देशभर में 10 करोड़ से अधिक नाम हटने का आंकड़ा आधिकारिक निर्वाचन आयोग का आंकड़ा नहीं है। यह संख्या SIR के संभावित प्रभाव को लेकर किए गए अनुमानों से जुड़ी है। द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक लेख में बिहार में 65 लाख नाम हटने के आधार पर देशव्यापी SIR से करीब 10 करोड़ नाम हटने का अनुमान व्यक्त किया गया था।
CPI(M) नेता ने कहा कि मतदाता सूची से किसी पात्र नागरिक का नाम केवल तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि के कारण नहीं हटना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से मतदाता सूची को लेकर उठाई गई आपत्तियों का चुनाव आयोग बिंदुवार जवाब सार्वजनिक करे।
CEC को हटाने और गिरफ्तारी की मांग
CPI(M) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की। पार्टी ने SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने तथा पिछले डेढ़ वर्ष में कराए गए विवादित विधानसभा चुनावों की समीक्षा की मांग भी रखी।
संजय कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग किसी राजनीतिक दल या गठबंधन का नहीं, बल्कि संविधान और मतदाता के अधिकारों का संरक्षक है। इसलिए आयोग के निर्णयों में संस्थागत पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही दिखाई देनी चाहिए।
ये लोग रहे मौजूद
प्रतिरोध मार्च और पुतला दहन कार्यक्रम में CPI(M) राज्य कमिटी सदस्य देवेंद्र चौरसिया, जिला सचिव सुरेंद्र प्रसाद महतो, जिला सचिवमंडल सदस्य रामविनय सिंह, कुंदन मेहता, नीतू देवी, जिला कमिटी सदस्य रामविलास वर्मा, संजीव कुमार, अमर कुमार यादव, रजनीश कुमार, अनिल वर्मा, अमरेंद्र कुमार, माला देवी, अलौली अंचल कमिटी सदस्य नीतीश कुमार यादव, खगड़िया अंचल कमिटी सदस्य छुट्ठु वर्मा, दुखनी देवी, रामचंद्र साहनी, धर्मवीर गौतम, बेबी कुमारी, बछौता के सरपंच मो. हाशिम, छात्र नेता सोनेलाल यादव और आयुषराज गोलू सहित पार्टी कार्यकर्ता व समर्थक मौजूद रहे।

