गरीब बाहर, ‘अपनों’ की एंट्री का आरोप; सरकारी कर्मी-शिक्षक और जनप्रतिनिधियों के परिजनों के नाम होने का दावा
खगड़िया/मानसी। मानसी प्रखंड की सैदपुर पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना की अनुमोदित सूची को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना के वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को दरकिनार कर कथित तौर पर प्रभावशाली और अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं। ग्रामीणों के दावों के मुताबिक सूची में सरकारी कर्मी, शिक्षक, पंचायत कर्मी, जनप्रतिनिधियों के परिजन और अविवाहित युवकों के नाम भी शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई ऐसे परिवार आज भी हैं, जिनके पास रहने के लिए पर्याप्त पक्का मकान नहीं है। इसके बावजूद कथित तौर पर पहले से पक्के मकान वाले लोगों को आवास योजना का लाभुक बनाए जाने से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
इन नामों की पात्रता पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची में कुछ नामों को उदाहरण के तौर पर चिन्हित किया गया है। उनके अनुसार—
क्रमांक 508: राहुल कुमार, पिता अनुज यादव—ग्रामीण उन्हें अविवाहित और पंचायत का स्वच्छता पर्यवेक्षक होने का दावा कर रहे हैं।
क्रमांक 687: लाभुक को रेलवे कर्मचारी बताया गया है।
क्रमांक 722: लाभुक के सरकारी शिक्षक होने का दावा किया गया है।
क्रमांक 505: मुखिया की पुत्रवधू का नाम होने का दावा।
क्रमांक 597: लाभुक को अविवाहित युवक और वार्ड सदस्य का पुत्र बताया गया है।
ग्रामीणों ने क्रमांक 122, 144, 162, 216, 220, 221, 273, 274, 353, 504, 527, 687 और 722 समेत कई अन्य नामों की पात्रता पर भी सवाल उठाए हैं।
70% से ज्यादा लाभुकों की पात्रता पर सवाल का दावा
ग्रामीणों का दावा है कि अनुमोदित सूची में 70 प्रतिशत से अधिक लाभुकों की पात्रता संदिग्ध है। आरोप है कि कई लाभुकों के पास पहले से पक्के और छतदार मकान मौजूद हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सूची में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक पात्रता और आवास की स्थिति का पता आधिकारिक जांच एवं भौतिक सत्यापन के बाद ही चल सकेगा।
पैसे की मांग का भी आरोप, स्वतंत्र पुष्टि नहीं
कुछ ग्रामीणों ने योजना में नाम शामिल कराने और लाभ दिलाने के नाम पर कथित तौर पर पैसे की मांग किए जाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पैसे देने से इनकार करने वाले कुछ जरूरतमंद परिवारों के नाम सूची में नहीं आए।
इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में कथित लेन-देन की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।
ग्रामीण बोले- घर-घर जाकर हो भौतिक सत्यापन
ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच सिर्फ पंचायत स्तर की कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखी जाए। जिला स्तर पर टीम गठित कर सभी लाभुकों के घरों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
साथ ही लाभुकों की आर्थिक स्थिति, मकान की स्थिति, सरकारी नौकरी अथवा अन्य पात्रता संबंधी तथ्यों और चयन प्रक्रिया की भी जांच की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि घर-घर सत्यापन से सूची की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी।
डीएम ने कहा- दावा आपत्ति में होगी जांच
खगड़िया के जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने मामले में कहा कि यदि इस तरह की शिकायत है तो दावा-आपत्ति के दौरान इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में पात्र लाभुक को ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए।
डीएम ने एनबी18 से सूची उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने बताया कि सूची मिलने के बाद बीडीओ को जांच के निर्देश दिए जाएंगे।
जांच के बाद साफ होगी सूची की तस्वीर
सैदपुर पंचायत की अनुमोदित सूची को लेकर उठे सवालों के बाद अब प्रशासनिक जांच पर सबकी नजर है। यदि किसी लाभुक की पात्रता नियमों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो कार्रवाई की स्थिति भी जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि वास्तविक गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके।

