कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र के सहयोग को बताया अहम; 13 से 31 हुए मेडिकल कॉलेज, एमबीबीएस सीटें 1310 से बढ़कर 4710 होने का दावा
पटना | बिहार में विकास परियोजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान केंद्र से बिहार सरकार को करीब 13 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। मुख्यमंत्री ने इस राशि और केंद्र के सहयोग को राज्य में सड़क, पुल, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार से जोड़कर बताया।
मुख्यमंत्री के संबोधन का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि बिहार की विकास यात्रा में केंद्रीय सहायता और राज्य सरकार के प्रयासों की क्या भूमिका रही है। उन्होंने पुरानी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से लेकर नए पुलों, मेडिकल कॉलेजों और हवाई अड्डों से जुड़ी योजनाओं तक का विवरण दिया।
2.67 लाख करोड़ से 13 लाख करोड़ तक पहुंचने का दावा
सम्राट चौधरी ने कहा कि 2013-14 तक के दस वर्षों में बिहार को लगभग 2.67 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। इसके मुकाबले, उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में करीब 13 लाख करोड़ रुपये सीधे बिहार सरकार को मिले।
मुख्यमंत्री ने इस आंकड़े को राज्य के विकास के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों में वृद्धि के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, इन दोनों अवधियों के आंकड़ों की सटीक तुलना के लिए केंद्रीय करों में हिस्सेदारी, अनुदान और अन्य मदों का अलग-अलग विवरण देखना जरूरी होगा।
पुल और सड़क संपर्क पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कई महत्वपूर्ण पुल परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कोसी रेल सेतु, जेपी सेतु, मुंगेर रेल-सह-सड़क पुल और गांधी सेतु के सुपर स्ट्रक्चर का उल्लेख किया।
उन्होंने यह भी बताया कि बक्सर, सोनपुर, शेरपुर-दिघवारा और भागलपुर समेत कई स्थानों पर पुल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बेगूसराय-सुजघड़ा के बीच सिक्स लेन पुल की प्रक्रिया और गांधी सेतु के समानांतर नए पुल का भी जिक्र किया गया।
इन परियोजनाओं से राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच आवागमन, व्यापार और माल ढुलाई को बेहतर बनाने की उम्मीद है। परियोजनाओं की प्रगति और निर्धारित समयसीमा का आकलन संबंधित विभागों के नवीनतम विवरण से किया जा सकेगा।
मेडिकल कॉलेज 13 से 31 होने की जानकारी
स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में 2012-13 के दौरान 13 मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या 2026-27 तक 31 होने की बात उन्होंने कही। उनके अनुसार, एमबीबीएस सीटें भी 1,310 से बढ़कर 4,710 हो गई हैं।
मुख्यमंत्री ने पटना, गया, भागलपुर, दरभंगा और मुजफ्फरपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों का उल्लेख किया। दरभंगा एम्स के भवन निर्माण के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की परियोजना का भी जिक्र किया।
इन आंकड़ों का महत्व केवल संस्थानों की संख्या तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेजों की वास्तविक क्षमता, डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं भी स्वास्थ्य व्यवस्था के आकलन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
आवास, बिजली और जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से 2026 के बीच बिहार में 55 लाख आवासों का निर्माण हुआ। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 11.25 लाख अतिरिक्त मकानों के लिए राशि उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
उन्होंने जनधन योजना के तहत 7.05 करोड़ से अधिक लोगों के खाते खुलने, उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 1.21 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन मिलने और गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत बिहार में 8.57 करोड़ जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलने का दावा भी किया।
मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को आम परिवारों की बुनियादी जरूरतों और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि केंद्र के सहयोग से राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली है।
विकसित भारत 2047 में बिहार की भूमिका
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को विकसित भारत 2047 के निर्माण में अग्रणी भागीदार बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने निवेश, रोजगार, उद्यमिता, नवाचार और सुशासन को राज्य की विकास प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने पर अभिनंदन प्रस्ताव के साथ बिहार के विकास में केंद्र के सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।
