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तिरपाल के नीचे पल रहे सपनों को मिली नई आस : जब कोसी की मार झेल रहे बच्चों के बीच ‘गुरुजी’ बनकर पहुंचे डीएम

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खगड़िया। कभी-कभी प्रशासन का एक कदम सरकारी व्यवस्था से आगे बढ़कर उम्मीद का चेहरा बन जाता है। बुधवार को बेलदौर प्रखंड की सुदूर इतमादी पंचायत के गांधीनगर गांव में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। यह वही गांव है, जहां वर्ष 2023 में कोसी नदी ने प्राथमिक विद्यालय की पूरी इमारत अपने आगोश में समेट ली थी। लेकिन नदी स्कूल का भवन बहा ले गई, बच्चों के सपने नहीं।

आज भी यहां पढ़ाई किसी पक्के भवन में नहीं, बल्कि एक तिरपाल की छांव में होती है। कभी झोपड़ी, कभी टीन के शेड और अब इतमादी पंचायत के मुखिया हिटलर शर्मा के बगीचे में बने अस्थायी तिरपाल के नीचे बच्चे रोज अपनी किताबों के साथ भविष्य संवारने पहुंचते हैं।

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इसी तिरपाल वाली पाठशाला में बुधवार को खगड़िया के जिलाधिकारी विक्रम वीरकर पहुंचे। उन्होंने न मंच तलाशा, न कुर्सी। सीधे बच्चों के बीच जमीन पर बैठ गए। कुछ ही देर में माहौल एक औपचारिक निरीक्षण से बदलकर गुरु और शिष्यों के संवाद में बदल गया।

“रोज स्कूल आते हो?”, “पढ़ाई अच्छी लगती है?”, “बड़े होकर क्या बनोगे?”—डीएम के इन सहज सवालों का बच्चों ने पूरे उत्साह से जवाब दिया। इसके बाद कक्षा तीन और पांच के विद्यार्थियों से हिंदी की पुस्तक का पाठ पढ़वाया गया। सीमित संसाधनों के बीच बच्चों की तैयारी और आत्मविश्वास देखकर जिलाधिकारी भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक गोरेलाल रविदास ने बताया कि वर्ष 2023 में कोसी कटाव के दौरान विद्यालय भवन नदी में समा गया था। तब से बच्चों की पढ़ाई किसी न किसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे जारी है। कठिनाइयों के बावजूद न शिक्षकों ने हार मानी और न ही बच्चों ने स्कूल आना छोड़ा।

ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता नए विद्यालय भवन को लेकर थी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह चिंता भी दूर कर दी। उन्होंने बताया कि विद्यालय के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है और एक माह के भीतर नए भवन का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

पूर्व में प्राथमिक शिक्षा निदेशक रह चुके विक्रम वीरकर का यह दौरा सिर्फ निरीक्षण नहीं था, बल्कि शिक्षा के प्रति संवेदनशील प्रशासन की एक जीवंत तस्वीर भी था। जब एक जिलाधिकारी बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर उनका पाठ सुनता है, तो वह केवल पढ़ाई का स्तर नहीं देखता, बल्कि उनके सपनों का सम्मान भी करता है।

बता दें कि कोसी की धारा ने इस गांव से स्कूल की दीवारें छीन ली थीं, लेकिन बच्चों की सीखने की जिद नहीं। अब उम्मीद है कि बहुत जल्द इन मासूम सपनों को तिरपाल नहीं, बल्कि अपने नए विद्यालय की मजबूत छत मिलेगी।

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