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₹4 हजार करोड़ की ‘लाइफलाइन’! खगड़िया–पूर्णिया फोरलेन से बदलेगी कोसी-सीमांचल की तकदीर

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सिर्फ सड़क नहीं, पूर्वी बिहार के विकास का नया अध्याय लिखेगी यह परियोजना; व्यापार, उद्योग, खेती और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार
NB18 | विशेष रिपोर्ट | अभिजीत सिन्हा

खगड़िया। बिहार के नक्शे पर कोसी-सीमांचल एक ऐसा इलाका रहा है, जहां अपार संभावनाएं होने के बावजूद कमजोर सड़क संपर्क विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्षों तक चुनावी मंचों से चौड़ी सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी के वादे किए गए, लेकिन लोगों की जिंदगी जाम, खराब सड़कों और लंबी यात्राओं के बीच ही गुजरती रही। अब उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दे रही है।

करीब ₹3,936 करोड़ की लागत से बनने वाला 143.5 किलोमीटर लंबा खगड़िया–पूर्णिया फोरलेन केवल एक हाईवे परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी बिहार की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला विकास कॉरिडोर बन सकता है। यह सड़क उन लाखों लोगों की उम्मीदों का रास्ता है, जो वर्षों से बेहतर संपर्क और तेज विकास का इंतजार कर रहे हैं।

सिर्फ दूरी नहीं घटेगी, विकास की रफ्तार बढ़ेगी

आज खगड़िया से पूर्णिया तक की यात्रा अक्सर जाम, भारी वाहनों की कतार और संकरी सड़क के कारण थका देने वाली होती है। फोरलेन बनने के बाद यही मार्ग कोसी-सीमांचल की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन धुरी बन सकता है। तेज और सुरक्षित आवागमन से व्यापार, पर्यटन और निवेश तीनों को नई गति मिलेगी।

केले से मखाना तक… किसानों की मेहनत को मिलेगा सही बाजार

खगड़िया का केला, कटिहार का मक्का, पूर्णिया का मखाना, डेयरी और मत्स्य उत्पादन इस क्षेत्र की पहचान हैं। लेकिन खराब सड़कें किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा निगल जाती हैं। फोरलेन बनने के बाद कृषि उत्पाद कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंचेंगे, परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसका असर सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

जहां सड़क जाती है, वहां निवेश भी पहुंचता है

बेहतर सड़क किसी भी क्षेत्र में उद्योगों और निवेश की पहली शर्त होती है। इस कॉरिडोर के विकसित होने के साथ वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल, पेट्रोल पंप, ट्रांसपोर्ट हब और छोटे-बड़े उद्योगों की संभावनाएं मजबूत होंगी। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन में भी कमी आ सकती है।

बाढ़ प्रभावित इलाके को मिलेगी मजबूत जीवनरेखा

हर वर्ष बाढ़ के दौरान कोसी-सीमांचल के कई हिस्सों में आवागमन प्रभावित होता है। मजबूत फोरलेन बनने से राहत एवं बचाव कार्यों की गति बढ़ेगी। एंबुलेंस, दमकल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अधिक तेज और सुचारु हो सकेगी। आपदा प्रबंधन की दृष्टि से भी यह सड़क बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

अब जनता को घोषणाओं से नहीं, काम से उम्मीद है

परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन असली चुनौती अब समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण की है। लोगों की निगाह इस बात पर टिकी है कि टेंडर प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और निर्माण कार्य कब धरातल पर दिखाई देता है। वर्षों से इंतजार कर रहे इस क्षेत्र के लोग अब केवल शिलान्यास नहीं, बल्कि सड़क पर दौड़ते विकास को देखना चाहते हैं।

NB18 विश्लेषण
खगड़िया–पूर्णिया फोरलेन केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है। यह पूर्वी बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाली जीवनरेखा बन सकती है। यदि यह परियोजना तय समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में कोसी-सीमांचल की पहचान पिछड़े क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि तेज़ी से उभरते विकास कॉरिडोर के रूप में होगी। यह सड़क केवल सफर नहीं बदलेगी, बल्कि लाखों लोगों का भविष्य भी बदल सकती है।
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