नई दिल्ली। राजनीति में कभी-कभी ऐसे किरदार सामने आते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि उन्हें किसी बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा बनाकर मैदान में उतारा गया है। ‘कॉकरोच’ भी इन दिनों कुछ ऐसी ही चर्चा का विषय बना हुआ है।
व्यंग्य की भाषा में कहें तो मोदी विरोध का यह ‘कॉकरोच’ अब जहां पहुंच रहा है, वहीं उसकी राजनीतिक पिटाई शुरू हो जा रही है। कभी विरोध, कभी विवाद और अब राजस्थान में कथित मारपीट—कॉकरोच की राजनीतिक यात्रा लगातार सुर्खियों में है।
दिलचस्प यह है कि जब-जब कॉकरोच पर संकट आता है, दिल्ली से उसकी आवाज बुलंद होती सुनाई देती है। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी राजस्थान की घटना को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और CJP कार्यकर्ताओं के पक्ष में प्रतिक्रिया दी।
यहीं से राजनीतिक व्यंग्य का सवाल खड़ा होता है—आखिर कॉकरोच में ऐसा क्या है कि उसके पिटते ही केजरीवाल की सियासी संवेदना जाग जाती है?
सियासी गलियारों में इसे नरेंद्र मोदी के खिलाफ तैयार किए गए एक नए राजनीतिक ‘शगूफे’ के तौर पर देखने वालों की कमी नहीं है। हालांकि, यह दावा कि इसे सीधे केजरीवाल ने तैयार या खड़ा किया है, राजनीतिक आरोप और व्यंग्य की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए।
फिलहाल तस्वीर यही है कि कॉकरोच का नाम जहां आता है, वहां विवाद साथ आता है और विवाद के साथ केजरीवाल की प्रतिक्रिया भी।
राजनीति में कहा जाता है कि मजबूत विकल्प जनता बनाती है। लेकिन अगर कोई राजनीतिक प्रयोग बार-बार सुर्खियों से ज्यादा टकराव और पिटाई की वजह बने, तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या यह मोदी विरोध का हथियार है या राजनीति का ऐसा शगूफा, जो खुद ही जगह-जगह पिटता घूम रहा है?
कॉकरोच डेली पिट रहा है, लेकिन सियासत में उसकी चर्चा बंद नहीं हो रही।

