बिहार के नगर निकायों में स्ट्रीट लाइट लगाने पर रोक से खगड़िया की 3500 लाइटों की निविदा प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका; नगर सभापति ने विभागीय व्यवस्था पर उठाए सवाल
खगड़िया | न्यूज बिहार 18 (NB18)
बिहार के नगर निकायों में स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका और अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर परिषद खगड़िया की सभापति अर्चना कुमारी ने अपने भेजे गए वक्तव्य में सवाल उठाया है कि जब महत्वपूर्ण निर्णय विभागीय स्तर पर ही लिए जाएंगे, तो जनता की समस्याओं का जवाब देने वाले जनप्रतिनिधि आखिर क्या करेंगे?
नगर सभापति की ओर से भेजी गई सामग्री के अनुसार, नगर परिषद खगड़िया में शहर की सड़कों और गलियों को रोशन करने के लिए करीब 3500 स्ट्रीट लाइट लगाने की निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से सामान्य और सोलर स्ट्रीट लाइट के नए अधिष्ठापन पर रोक लगाने के निर्देश के बाद इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
अर्चना कुमारी ने इस मुद्दे के माध्यम से नगर निकायों के कामकाज, विभागीय निर्णयों और जनता के प्रति जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का सवाल प्रमुखता से उठाया है।
सभापति का सवाल—जनता को जवाब कौन देगा?
नगर सभापति की ओर से भेजे गए वक्तव्य में कहा गया है कि नगर निकायों में जनता का सीधा संपर्क सभापति, उपसभापति और वार्ड पार्षदों से होता है। किसी गली में अंधेरा हो, स्ट्रीट लाइट खराब हो या सफाई और डस्टबिन की समस्या हो, तो लोग सबसे पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से ही शिकायत करते हैं।

जनता निर्वाचित प्रतिनिधियों से समस्याओं के समाधान की अपेक्षा करती है। ऐसे में यदि किसी योजना के क्रियान्वयन पर विभागीय निर्देशों के कारण रोक लग जाती है, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सामने भी मुश्किल खड़ी हो जाती है।
सभापति की ओर से उठाया गया मूल सवाल यही है कि जब किसी योजना को आगे बढ़ाने की अनुमति ही नहीं होगी, तो जनप्रतिनिधि जनता की मांगों को पूरा करने के लिए क्या कर सकते हैं?
यह सवाल केवल खगड़िया नगर परिषद का नहीं, बल्कि बिहार के उन सभी नगर निकायों से जुड़ा है, जहां नागरिक सुविधाओं से संबंधित योजनाएं विभागीय निर्देशों के अधीन संचालित होती हैं।
3500 स्ट्रीट लाइटों की योजना पर आगे क्या होगा?
नगर परिषद खगड़िया में करीब 3500 स्ट्रीट लाइट लगाने की तैयारी शहर की प्रकाश व्यवस्था बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। शहर की सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त रोशनी आम नागरिकों की जरूरत है।
नगर सभापति की ओर से भेजी गई सामग्री में कहा गया है कि विभागीय निर्देश के कारण नई लाइटों के अधिष्ठापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि खगड़िया की निविदा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
स्ट्रीट लाइट से आगे सफाई और डस्टबिन का भी सवाल
सभापति की ओर से भेजे गए वक्तव्य में नगर निकायों की दूसरी नागरिक सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें डस्टबिन की खरीद और स्थापना, सफाई व्यवस्था तथा सार्वजनिक स्थलों की देखरेख जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन सुविधाओं का सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से है। जब किसी योजना की खरीदारी या क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो उसका असर जनता पर पड़ता है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछे जाते हैं।
ऐसी स्थिति में विभागीय निर्णय समय पर होना और नगर निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलना जरूरी है, ताकि योजनाओं को लेकर अनिश्चितता नहीं बनी रहे।
विभागीय नियंत्रण और स्थानीय जरूरतों में संतुलन की मांग
नगर सभापति की ओर से भेजी गई सामग्री में इस बात पर जोर दिया गया है कि हर शहर की जरूरतें अलग-अलग होती हैं। कहीं प्रकाश व्यवस्था की समस्या गंभीर है, तो कहीं जलजमाव, सफाई और कचरा प्रबंधन प्राथमिकता है।
स्थानीय निकाय अपने क्षेत्र की समस्याओं को करीब से समझते हैं। इसलिए राज्य सरकार के नीतिगत निर्देशों के साथ स्थानीय जरूरतों और योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टता आवश्यक है।
नगर विकास एवं आवास विभाग को यह बताना चाहिए कि किन कार्यों को जारी रखा जा सकता है, किन मामलों में विभागीय अनुमति जरूरी है और लंबित योजनाओं के संबंध में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सरकार और विभाग से सभापति की प्रमुख अपेक्षाएं
नगर सभापति की ओर से भेजी गई सामग्री में निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्टता की आवश्यकता जताई गई है:
1. बिहार के नगर निकायों में स्ट्रीट लाइट अधिष्ठापन पर रोक के संबंध में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए।
2. नगर परिषद खगड़िया में करीब 3500 स्ट्रीट लाइटों की निविदा के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
3. पहले से लगी खराब स्ट्रीट लाइटों के आवश्यक रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
4. डस्टबिन, सफाई और अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्टता लाई जाए।
5. स्थानीय निकायों को उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और विभागीय अनुमति की प्रक्रिया के बारे में समय पर जानकारी दी जाए।
अर्चना कुमारी ने उठाया जवाबदेही और अधिकार का मुद्दा
नगर परिषद खगड़िया की सभापति अर्चना कुमारी की ओर से भेजी गई सामग्री में मूल रूप से जनता की अपेक्षाओं और विभागीय निर्णय प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जनता के प्रति होती है, जबकि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्पष्टता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। दोनों के बीच समन्वय नहीं होने पर विकास योजनाओं में देरी की आशंका बनी रहती है।
अब देखना होगा कि नगर विकास एवं आवास विभाग खगड़िया की 3500 स्ट्रीट लाइटों की निविदा और राज्य के अन्य नगर निकायों में नए अधिष्ठापन को लेकर क्या स्पष्टता देता है।
सभापति की ओर से उठाया गया सवाल अब विभागीय निर्णय और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत को सामने लाता है। जनता को सुविधाएं चाहिए, जनप्रतिनिधियों को जवाबदेही निभानी है और योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक दिशा भी जरूरी है।
