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“कायस्थ समाज को कुछ नेताओं के भरोसे मत आंकिए” : पीएम मोदी को वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत सिन्हा का खुला पत्र, बांकीपुर उपचुनाव का दिया हवाला

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भाजपा के प्रति दशकों की निष्ठा का किया उल्लेख, कहा— “समाज का विश्वास बनाए रखना चुनावी जीत जितना ही महत्वपूर्ण”

खगड़िया/नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम के बाद जारी चर्चाओं के बीच वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र भेजकर भारतीय जनता पार्टी और कायस्थ समाज के रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में उन्होंने दावा किया है कि भाजपा के प्रति दशकों से निष्ठावान रहे कायस्थ समाज का एक बड़ा वर्ग आज स्वयं को राजनीतिक रूप से उपेक्षित महसूस कर रहा है और पार्टी को इस संकेत को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
अपने पत्र में अभिजीत सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि उनका यह पत्र किसी पद, टिकट, राजनीतिक लाभ या व्यक्तिगत अपेक्षा के लिए नहीं है। उन्होंने लिखा है कि यह उन लाखों कायस्थ परिवारों की भावना है, जिन्होंने वर्षों तक भाजपा को केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रतिनिधि मानकर बिना किसी शर्त उसका साथ दिया।
पत्र का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भाजपा के संगठनात्मक दृष्टिकोण को लेकर है। अभिजीत सिन्हा ने लिखा है कि पार्टी को यह मान लेना कि कुछ कायस्थ चेहरे ही पूरे समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वास्तविकता से दूर है। उनके अनुसार किसी भी समाज की राजनीतिक सोच का आकलन केवल कुछ नेताओं के माध्यम से नहीं किया जा सकता। समाज का वास्तविक मनोभाव उसके युवाओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, उद्यमियों, कर्मचारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दिखाई देता है।
उन्होंने हाल ही में हुए पटना के बांकीपुर उपचुनाव का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उनकी दृष्टि में यह परिणाम केवल भाजपा की चुनावी हार नहीं था, बल्कि उन नेताओं के राजनीतिक प्रभाव की भी परीक्षा थी, जो वर्षों से स्वयं को पूरे कायस्थ समाज का प्रतिनिधि बताते रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि यदि समाज के भीतर व्यापक स्वीकार्यता होती, तो उसका असर चुनावी परिणामों में भी दिखाई देता।
पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि आज कायस्थ समाज के भीतर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या उसकी भूमिका केवल मतदान तक सीमित रह गई है। क्या चुनाव समाप्त होने के बाद उसकी भागीदारी और अपेक्षाओं को महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा है कि यह असंतोष किसी विरोध की भावना से नहीं, बल्कि उस समाज की पीड़ा है जिसने लंबे समय तक बिना किसी शर्त भाजपा का साथ दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे संवाद करते हुए अभिजीत सिन्हा ने आग्रह किया है कि भाजपा कायस्थ समाज को केवल कुछ नेताओं की रिपोर्ट के आधार पर न आंके, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद स्थापित करे। उनका कहना है कि इससे पार्टी को वास्तविक स्थिति और समाज की अपेक्षाओं का सही आकलन मिलेगा।
पत्र में प्रधानमंत्री के लोकप्रिय मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा है कि कायस्थ समाज आज भी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास रखता है। समाज किसी विशेष अधिकार या पद की मांग नहीं कर रहा, बल्कि केवल सम्मानजनक भागीदारी और अपनी निष्ठा के उचित सम्मान की अपेक्षा कर रहा है।

राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को लेकर हर दल अपनी रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे समय में भाजपा के समर्थक माने जाने वाले किसी वर्ग की ओर से प्रतिनिधित्व और संवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, इस पत्र पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पत्र के अंत में अभिजीत सिन्हा ने लिखा है—

“इतिहास गवाह है कि विश्वास टूटने में एक क्षण लगता है, लेकिन उसे बनाने में पीढ़ियाँ लग जाती हैं। कायस्थ समाज का विश्वास आज भी भाजपा के साथ है। हमारा विनम्र आग्रह है कि इस विश्वास को और मजबूत किया जाए।”

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