तेज बारिश में एमजी मार्ग, मील रोड, सन्हौली, बाजार और मोहल्ले डूबे; करोड़ों के विकास के दावों पर उठे सवाल
खगड़िया। बड़े अखबारों में पिछले कुछ दिनों से खगड़िया नगर परिषद की ओर से खबर के स्वरूप में विकास की लंबी-चौड़ी गाथा प्रकाशित हो रही है। करोड़ों रुपये की योजनाओं, शहर के कायाकल्प और आधुनिक विकास के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन बुधवार की पहली तेज बारिश ने उन दावों को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया।
एमजी मार्ग, मील रोड, सन्हौली सूर्य मंदिर रोड, मुख्य बाजार और कई मोहल्ले घंटों पानी में डूबे रहे। सड़कें तालाब में बदल गईं। दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हुआ। राहगीर घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहली ही बारिश में शहर की यह हालत हो जाती है, तो आखिर करोड़ों रुपये के विकास का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
खबर के नाम पर विकास का प्रचार, लेकिन हकीकत कुछ और
नगर परिषद की ओर से प्रकाशित खबरों में शहर के विकास की तस्वीर दिखाई जा रही है। लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग है। जल निकासी की व्यवस्था हर वर्ष बारिश में ही जवाब दे रही है।
अगर शहर का विकास वास्तव में हुआ है, तो फिर—
हर साल वही सड़कें जलमग्न क्यों होती हैं?
नालियां पहली बारिश में ही बेअसर क्यों हो जाती हैं?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर का ड्रेनेज सिस्टम आज भी क्यों फेल है?
क्या विकास सिर्फ अखबारों में दिखाई देगा, सड़कों पर नहीं?
सबसे बड़ा सवाल—जवाबदेह कौन?
जलजमाव कोई नई समस्या नहीं है। हर मानसून में यही हाल होता है। इसका मतलब साफ है कि नगर परिषद को समस्या की जानकारी है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया।
शहर में पीसीसी सड़कें बनती रहीं, योजनाएं स्वीकृत होती रहीं, लेकिन जल निकासी का वैज्ञानिक मास्टर प्लान आज भी जमीन पर दिखाई नहीं देता।
अगर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की सड़कों पर पानी बह रहा है, तो जनता यह पूछने का अधिकार रखती है कि इस विफलता की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
खबर या छवि सुधार अभियान?
लोकतंत्र में जनता को काम की जानकारी देना जरूरी है। लेकिन जब खबर के रूप में सिर्फ उपलब्धियां प्रकाशित हों और उसी समय शहर की सड़कें नगर परिषद के दावों की पोल खोल रही हों, तब सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या खबरों में यह भी बताया गया कि—
एमजी मार्ग जलमग्न था?
मील रोड पर घंटों पानी जमा रहा?
बाजार और मोहल्लों में लोगों का निकलना मुश्किल हो गया?
व्यापारियों और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी?
अगर नहीं, तो जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या खबरों के जरिए विकास दिखाकर जमीनी सच्चाई से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है?
News Bihar 18 का सवाल
खगड़िया की जनता को अब दावे नहीं, ड्रेनेज चाहिए।
जनता टैक्स इसलिए नहीं देती कि उसके पैसे से विकास की चमकदार खबरें प्रकाशित हों। जनता टैक्स इसलिए देती है कि बारिश के बाद उसका शहर डूबे नहीं।
नगर परिषद को अब एक ही सवाल का जवाब देना चाहिए—अगर विकास के दावे सही हैं, तो हर बारिश में खगड़िया क्यों डूब जाता है?
जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिलता, तब तक करोड़ों के विकास की खबरें जनता की नजर में अधूरी रहेंगी और पानी में डूबी सड़कें ही नगर परिषद के कामकाज का सबसे बड़ा रिपोर्ट कार्ड मानी जाएंगी।

