खगड़ियाप्रदेशबड़ी खबर

खगड़िया में 165 सफाईकर्मी सड़क पर, जिम्मेदार सोशल मीडिया पर! मजदूरों के पैसे गटकने वाले NGO पर कार्रवाई कब?

1 Mins read

मजदूरी-PF के सवालों पर धरना, सभापति प्रतिनिधि के आरोपों से गरमाया मामला; सवाल—कर्मियों की सुनवाई कब?

22 वार्डों की सफाई ठप, कर्मियों का दावा- भुगतान और PF में गड़बड़ी; EO सिंधु कमल बोले- सरकारी मानदेय से कम मिला तो होगी कार्रवाई

खगड़िया। शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। 22 वार्डों के 165 सफाईकर्मी हड़ताल पर हैं, लेकिन आंदोलन की वजह जानने और समाधान निकालने के बजाय नगर परिषद की राजनीति अब सोशल मीडिया पोस्ट तक पहुंच गई है। नगर परिषद सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा की लगातार सोशल मीडिया पोस्ट में आंदोलन के पीछे निजी स्वार्थ और सफाईकर्मियों को भड़काने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

लेकिन असली सवाल इससे भी बड़ा है—क्या 165 सफाईकर्मियों की शिकायत सुने बिना ही उन्हें किसी के बहकावे में आया हुआ मान लिया गया?

कर्मियों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि मजदूरी, PF और वेतन कटौती को लेकर है। ऐसे में नगर परिषद के जिम्मेदार प्रतिनिधि से उनकी अपेक्षा थी कि वे धरनास्थल पर पहुंचते, कर्मियों से सीधे बात करते और संबंधित NGO से हिसाब लेकर कार्रवाई का भरोसा देते।

सोशल मीडिया पर सवाल, धरनास्थल पर संवाद क्यों नहीं?

सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा की सोशल मीडिया पोस्ट में एक व्यक्ति पर सफाई व्यवस्था को अस्थिर करने, सफाईकर्मियों को भ्रमित करने और निजी स्वार्थ के लिए नगर परिषद की व्यवस्था को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने सफाईकर्मियों से भी ऐसे लोगों के बहकावे में नहीं आने की अपील की है।

लेकिन News Bihar 18 का सीधा सवाल है—अगर सफाईकर्मियों की मांग गलत है तो नगर परिषद को उनके साथ बैठकर यह स्पष्ट करना चाहिए। और अगर उनकी शिकायत सही है तो संबंधित NGO पर कार्रवाई क्यों नहीं?

आरोप से पहले संवाद और संवाद के बाद समाधान—यही जिम्मेदार प्रशासन की पहचान होनी चाहिए।

EO ने कहा- कर्मियों को सरकार का तय मानदेय मिलना चाहिए

मामले में नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी सिंधु कमल ने News Bihar 18 से बातचीत में स्पष्ट कहा कि सफाईकर्मियों की समस्या जल्द सुलझाई जाएगी।

उन्होंने कहा कि सफाईकर्मियों को सरकार द्वारा तय मानदेय मिलना चाहिए। इस मामले में NGO को बुलाया गया है। उससे PF और सैलरी कटौती से संबंधित पूरी जानकारी ली जाएगी।

EO ने यह भी कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि मजदूरों का पैसा इधर-उधर हुआ है तो कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।

यानी अब गेंद सीधे नगर परिषद और आउटसोर्स एजेंसी के पाले में है।

₹507 की मजदूरी तय लेकिन मात्र ₹6,700 तक भुगतान का दावा

हड़ताल कर रहे कर्मियों के अनुसार सरकार की ओर से सफाईकर्मी के लिए ₹507 प्रतिदिन की दर निर्धारित है। 26 दिन के हिसाब से यह राशि ₹13,182 प्रतिमाह बैठती है।

कर्मियों का दावा है कि महिलाओं को ₹6,700 और पुरुषों को ₹7,700 ही मिल रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने भुगतान में करीब ₹9.56 लाख प्रतिमाह के अंतर का दावा किया है

हालांकि यह गणना कर्मियों द्वारा बताए गए भुगतान और ₹507 की दर पर आधारित है। वास्तविक स्थिति NGO के अनुबंध, हाजिरी, भुगतान रिकॉर्ड और PF दस्तावेजों की जांच से ही सामने आएगी।

तीन साल के PF का हिसाब भी बनेगा जांच का मुद्दा

कर्मियों की ओर से करीब तीन वर्षों से PF का स्पष्ट हिसाब नहीं मिलने का आरोप लगाया जा रहा है।

अब जांच में यह साफ होना जरूरी है कि—

किस कर्मचारी के वेतन से कितना PF कटा?

कितना जमा हुआ?

UAN क्या है?

किस खाते में राशि गई?

और नगर परिषद ने NGO को किस आधार पर भुगतान किया?

अगर रिकॉर्ड साफ है तो उसे सामने रखने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अब 165 कर्मियों से सीधे बात करे नगर परिषद

हड़ताल खत्म कराने का सबसे आसान रास्ता आरोप-प्रत्यारोप नहीं, सीधा संवाद है।

नगर परिषद को चाहिए कि 22 वार्डों के 165 सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी शिकायतें सुने। NGO को सामने बैठाया जाए। मजदूरी और PF के दस्तावेज मंगाए जाएं और जांच के बाद जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई का स्पष्ट भरोसा दिया जाए।

क्योंकि झाड़ू उठाने वाले हाथ किसी के राजनीतिक मोहरे नहीं हैं। वे नगर परिषद की सफाई व्यवस्था की रीढ़ हैं।

अब सवाल ज्योतिष मिश्रा से भी

सभापति प्रतिनिधि की जिम्मेदारी सिर्फ सोशल मीडिया पर सफाई व्यवस्था को लेकर बयान देना नहीं, बल्कि सफाईकर्मियों की समस्या का समाधान कराना भी है।

अगर 165 कर्मचारी एक साथ हड़ताल पर हैं तो यह केवल कानून-व्यवस्था या सफाई व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। यह इस बात की भी जांच मांगता है कि आखिर इतने कर्मचारी एक साथ काम बंद करने के लिए मजबूर क्यों हुए?

क्या उनकी शिकायत गलत है?

क्या NGO ने पूरा भुगतान किया?

क्या PF जमा हुआ?

क्या हाजिरी और भुगतान का रिकॉर्ड सही है?

इन सवालों का जवाब फेसबुक पोस्ट नहीं, दस्तावेज देंगे।

अब शहर को चाहिए कार्रवाई, पोस्ट नहीं

कार्यपालक अधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब जरूरत है कि नगर परिषद इस भरोसे को जमीन पर उतारे।

165 सफाईकर्मियों से बातचीत हो। NGO से पूरा हिसाब लिया जाए। PF की जांच हो। वेतन कटौती का आधार सामने आए। और जहां गड़बड़ी मिले, वहां कार्रवाई हो।

क्योंकि मामला सिर्फ तीन दिन से बंद पड़ी झाड़ू का नहीं है।

मामला उन 165 परिवारों का है, जिनकी रोजी-रोटी इसी मजदूरी से चलती है।

और सबसे बड़ा सवाल यही है—

“सफाईकर्मियों की आवाज सुनने के बजाय अगर सोशल मीडिया पर आरोप ही लगाए जाते रहे, तो खगड़िया की सफाई व्यवस्था आखिर कब पटरी पर आएगी?”

293 posts

About author
News Bihar 18 बिहार की खबरों का विश्वसनीय डिजिटल मंच। News Bihar 18 पर आपको बिहार की राजनीति, प्रशासन, विकास, शिक्षा, रोजगार, अपराध, सामाजिक सरोकार और देश-दुनिया से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें मिलती हैं। निष्पक्ष खबर • तथ्यपरक जानकारी • जनसरोकार 📍 बिहार की हर महत्वपूर्ण खबर पर हमारी नजर 🌐 newsbihar18.com
Articles

Leave a Reply

Install App