22 वार्डों में तीसरे दिन भी सफाई ठप; ₹507 रोज की दर का दावा, महिलाओं को ₹6,700 और पुरुषों को ₹7,700 भुगतान का आरोप
खगड़िया। शहर को साफ रखने वाले हाथों ने तीसरे दिन भी झाड़ू नहीं उठाई। नगर परिषद खगड़िया के 22 वार्डों में सफाई और कचरा उठाव प्रभावित है। शिवशक्ति NGO के जरिए आउटसोर्स पर काम कर रहे 165 सफाईकर्मी अपनी मांगों को लेकर धरने पर हैं। इनमें 52 महिलाएं और 113 पुरुष शामिल हैं। 1 सितंबर से 22 वार्डों में हड़ताल की घोषणा की गई थी।
हड़ताल के बीच NewsBihar18 की पड़ताल में मजदूरी के गणित ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। कर्मियों के बताए आंकड़ों के मुताबिक सरकारी दर और उन्हें मिलने वाले भुगतान में हर महीने करीब ₹9.56 लाख का अंतर सामने आ रहा है।
₹13,182 बनता है, ₹6,700-₹7,700 मिलने का दावा
कर्मियों का दावा है कि सफाईकर्मी के लिए ₹507 प्रतिदिन की दर है। 26 दिन के हिसाब से मासिक राशि ₹13,182 बैठती है। लेकिन उनके अनुसार महिलाओं को ₹6,700 और पुरुषों को ₹7,700 ही मिल रहे हैं।
महिला सफाई कर्मी
कर्मी भुगतान मिलना चाहिए अंतर कुल मासिक अंतर
52 ₹6,700 ₹13,182 ₹6,482 ₹3,37,064
पुरुष सफाई कर्मी
कर्मी भुगतान मिलना चाहिए अंतर कुल मासिक अंतर
113 ₹7,700 ₹13,182 ₹5,482 ₹6,19,466
यानि कुल सफाई कर्मी
165
भुगतान ₹12,18,500
मिलनी चाहिए ₹21,75,030
कुल मासिक अंतर ₹9,56,530
कर्मियों के बताए आंकड़ों के आधार पर ₹9.56 लाख का अंतर हर महीने और करीब ₹1.15 करोड़ सालाना बैठता है।
गौरतलब है कि यह गणना कर्मियों द्वारा बताए गए भुगतान और ₹507 की दर पर आधारित है। इसे वित्तीय अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति के लिए टेंडर, वर्क ऑर्डर, अनुबंध, हाजिरी, भुगतान और PF रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
सिर्फ मजदूरी का सालाना गणित ₹2.61 करोड़
₹13,182 मासिक की दर से 165 कर्मियों की सालाना मजदूरी करीब ₹2,61,00,360 यानी ₹2.61 करोड़ बैठती है। PF, ESI, एजेंसी शुल्क और अनुबंध की अन्य मदों को जोड़ने पर कुल ठेका राशि अलग हो सकती है।
कर्मियों की ओर से ₹5 करोड़ तक के अंतर का दावा भी किया जा रहा है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र दस्तावेजी पुष्टि अभी बाकी है।
NGO का जवाब: 2 से 3 घंटे ही काम करते हैं
शिवशक्ति NGO के कंडक्टर हेमचंद राम का कहना है कि कर्मी रोजाना करीब 2 से 3 घंटे ही काम करते हैं, इसलिए भुगतान कम है। लेकिन इसके साथ ही सवाल उठता है—क्या काम के घंटे अनुबंध में तय हैं? हाजिरी कैसे बनती है? और नगर परिषद एजेंसी के बिल का सत्यापन किस आधार पर करती है?
PF के सवाल पर NGO की ओर से कहा गया कि कर्मियों ने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं।
तीन साल से PF के हिसाब की मांग
सफाईकर्मियों का आरोप है कि करीब तीन साल से PF का स्पष्ट हिसाब नहीं मिला है। उनका कहना है कि यदि वेतन से PF की कटौती हुई है तो कर्मचारीवार जमा राशि, UAN और PF स्टेटमेंट सार्वजनिक किया जाए।
अब सवाल सिर्फ मजदूरी का नहीं, कटौती और जमा राशि के पूरे रिकॉर्ड का भी है।
झाड़ू बंद होते ही 22 वार्डों में असर
तीन दिन से सफाईकर्मियों के काम बंद रहने से शहर में कचरा उठाव प्रभावित है। सफाईकर्मियों ने न्यूनतम मजदूरी, समय पर भुगतान और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। आंदोलन को मांगें पूरी होने तक जारी रखने की बात कही गई है।
संजीव डोम के समर्थन से गरमाया मामला
आंदोलन के समर्थन में संजीव डोम के पहुंचने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए आंदोलन भड़काने का आरोप लगाया।
संजीव डोम ने कहा कि उन्हें आरोप-प्रत्यारोप से मतलब नहीं है और वे वंचितों के अधिकार के साथ खड़े हैं।
अब ये 5 दस्तावेज बताएंगे असली हिसाब
1. नगर परिषद का टेंडर और वर्क ऑर्डर
2. शिवशक्ति NGO के साथ हुआ अनुबंध
3. 165 कर्मियों की हाजिरी
4. भुगतान वाउचर और बैंक ट्रांसफर रिकॉर्ड
5. PF-ESI जमा रिकॉर्ड और NGO को नगर परिषद से किए गए भुगतान के बिल
इन दस्तावेजों से साफ होगा कि सरकारी दर क्या है, एजेंसी को कितना भुगतान हुआ, कर्मियों को कितना मिला और भुगतान में अंतर का आधार क्या है।
कर्मियों की मांग—हक दो, हिसाब दो
सफाईकर्मियों की मांग है कि सरकारी दर के अनुसार पूरा भुगतान किया जाए, PF का कर्मचारीवार रिकॉर्ड सार्वजनिक हो, भुगतान में कटौती का आधार बताया जाए, अक्टूबर से नई दर लागू की जाए और नगर परिषद-एजेंसी के अनुबंध की शर्तें सार्वजनिक की जाएं।
सवाल कचरे से बड़ा है
शहर कचरे में है, लेकिन अब सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, हिसाब का है।
कर्मियों के बताए आंकड़ों के मुताबिक हर महीने ₹9.56 लाख का अंतर सामने आ रहा है। क्या यह काम के घंटे का मामला है? क्या अनुबंध में इसकी व्यवस्था है? PF की रकम कहां जमा हुई? और नगर परिषद ने एजेंसी को कुल कितना भुगतान किया? हालांकि इन सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, दस्तावेजों से मिलेगा।
NewsBihar18 की पड़ताल का अगला सवाल यही है—नगर परिषद और एजेंसी क्या 165 सफाईकर्मियों का पूरा हाजिरी, भुगतान और PF रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगी?

