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बिहार में नर्सिंग कॉलेजों का NOC पोर्टल बंद, करोड़ों का निवेश और हजारों युवाओं का भविष्य अधर में

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पटना, बिहार। बिहार में स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अप्रैल 2026 में निजी नर्सिंग संस्थानों के लिए ऑनलाइन एनओसी (NOC) पोर्टल की शुरुआत की थी, लेकिन कुछ ही समय बाद यह पोर्टल बिना किसी आधिकारिक सूचना के बंद कर दिया गया। इससे निजी संस्थानों का करोड़ों रुपये का निवेश फंस गया है और हजारों युवाओं के रोजगार पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था पोर्टल

स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रैल 2026 में निजी नर्सिंग कॉलेजों और संस्थानों के लिए ऑनलाइन एनओसी आवेदन पोर्टल लॉन्च किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम में राज्यभर के संस्थान संचालकों को आमंत्रित किया गया था और उसी दिन कई संस्थानों ने ऑनलाइन आवेदन भी जमा किए थे। जानकारी के अनुसार, कुछ संस्थानों को तत्काल एनओसी जारी कर दी गई, जबकि बड़ी संख्या में आवेदन अब भी लंबित हैं।

बिना सूचना बंद हो गया पोर्टल

निजी संस्थानों के संचालकों का आरोप है कि पोर्टल शुरू होने के कुछ ही समय बाद इसे बिना किसी आधिकारिक आदेश या सूचना के बंद कर दिया गया। इसके बाद से आवेदनों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। संस्थान संचालकों का कहना है कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

करोड़ों रुपये का निवेश संकट में

संस्थानों का कहना है कि उन्होंने भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) के मानकों के अनुरूप भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास और अन्य आवश्यक सुविधाओं के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। कई संचालकों ने बैंक से ऋण लेकर बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया है। हालांकि, एनओसी नहीं मिलने के कारण संस्थानों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है, जिससे आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।

रोजगार के अवसरों पर भी असर

संस्थान संचालकों का दावा है कि यदि लंबित एनओसी आवेदनों का समय पर निस्तारण कर दिया जाए तो बिहार में स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हो सकता है। उनका कहना है कि प्रत्येक संस्थान में लगभग 100 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है। ऐसे में राज्य में एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

निजी संस्थानों के संचालकों ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से जल्द हस्तक्षेप करते हुए बंद पड़े पोर्टल को दोबारा शुरू करने और लंबित आवेदनों का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर निर्णय नहीं होने से न केवल निजी निवेश प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में कौशल विकास की प्रक्रिया भी बाधित हो रही है।

उठ रहे हैं कई सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ने ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया और आवेदन भी स्वीकार किए, तो फिर उसे बिना किसी आधिकारिक सूचना के बंद क्यों किया गया? लंबित आवेदनों का निस्तारण कब होगा और संस्थानों का फंसा हुआ निवेश कब सुरक्षित होगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार अब भी बना हुआ है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर संस्थान संचालकों, छात्रों और रोजगार की उम्मीद लगाए बैठे हजारों युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं।

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