विशेष रिपोर्ट: अभिजीत सिन्हा, प्रधान संपादक, NB18 बिहार
पटना। बिहार की राजनीति में कुछ सीटें सिर्फ चुनाव नहीं लड़तीं, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा का संकेत भी देती हैं। बांकीपुर विधानसभा ऐसी ही सीट है। हर चुनाव में इस सीट पर पूरे प्रदेश की नजर रहती है, क्योंकि यहां का जनादेश अक्सर शहरी मतदाताओं की राजनीतिक सोच का आईना माना जाता है।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नितिन नवीन ने कांग्रेस के लव सिन्हा को 39,036 वोटों के अंतर से हराकर लगातार चौथी बार इस सीट पर पार्टी का परचम लहराया था। बीजेपी को 83,068 वोट (59.05%) मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 44,032 वोट (31.30%) प्राप्त हुए थे।
अब तस्वीर बदल चुकी है। उम्मीदवार बदले हैं, मुद्दे बदले हैं और चुनावी समीकरण भी नए सिरे से बन रहे हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस बार मुकाबले में प्रशांत किशोर भी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं, जिससे चुनाव की राजनीतिक दिलचस्पी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
इन्हीं बदले हुए हालात के बीच NB18 बिहार ने मतदान से पहले विधानसभा क्षेत्र में कई दिनों तक स्वतंत्र ग्राउंड सर्वे किया। वार्डों, बाजारों, आवासीय कॉलोनियों, बूथ क्षेत्रों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के मतदाताओं से बातचीत के बाद जो तस्वीर उभरकर सामने आई, वह पिछले चुनाव की याद जरूर दिलाती है, लेकिन इस बार कुछ नए संकेत भी छोड़ती है।
NB18 की ग्राउंड टीम के फीडबैक के अनुसार यदि मतदान तक मौजूदा रुझान में बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाए रख सकती है। आंतरिक चुनावी विश्लेषण में संभावित बढ़त का अनुमान करीब 33 हजार वोट तक पहुंचता दिखाई देता है। यह अनुमान केवल ग्राउंड फीडबैक, स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और क्षेत्रीय रुझानों के विश्लेषण पर आधारित है।
हालांकि, ग्राउंड रिपोर्ट का एक दूसरा महत्वपूर्ण निष्कर्ष भी है। कई इलाकों में यह महसूस किया गया कि प्रशांत किशोर ने चुनावी मुकाबले को एकतरफा नहीं रहने दिया है। विशेषकर युवाओं, पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं और बदलाव की बात करने वाले वर्ग में उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय रही। यही कारण है कि राजनीतिक दृष्टि से उन्हें कमतर आंकना किसी भी दल के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
फिलहाल, ग्राउंड पर जो संकेत मिल रहे हैं, वे बीजेपी के पक्ष में बढ़त की ओर इशारा करते हैं। लेकिन चुनावी इतिहास यह भी बताता है कि अंतिम फैसला केवल मतदाता करता है। इसलिए यह रिपोर्ट NB18 बिहार का चुनाव-पूर्व पत्रकारिता आधारित आकलन है, न कि परिणाम की घोषणा।

