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तीन दशक की पुलिस सेवा को सलाम: DIG राकेश कुमार सिन्हा को गृह मंत्रालय का सराहनीय सेवा पदक

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DSP से IPS और फिर DIG तक का सफर, कानून-व्यवस्था से लेकर निगरानी जांच तक निभाईं अहम जिम्मेदारियां; 32 प्रशस्ति-पत्रों के बाद मिला राष्ट्रीय सम्मान

पटना। करीब तीन दशक की पुलिस सेवा में अलग-अलग जिम्मेदारियों को कुशलता से निभाने वाले बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी एवं निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के DIG राकेश कुमार सिन्हा को भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय, नई दिल्ली की ओर से Police Medal for Meritorious Services (सराहनीय सेवा पदक) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनके लंबे सेवाकाल में कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता, उत्कृष्ट कार्यशैली और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों के सफल निर्वहन की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मान्यता है।

वर्ष 1999 बैच में सीधे DSP के रूप में पुलिस सेवा में आए राकेश कुमार सिन्हा ने वर्ष 2001 में दुमका से अपनी सेवा शुरू की। इसके बाद बिहार के जहानाबाद, शेखपुरा, रोहतास, समस्तीपुर, जमुई, नालंदा, सुपौल और खगड़िया समेत कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने STF, BPA, ATS और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में भी काम किया। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नक्सल संबंधी चुनौतियों और गंभीर मामलों के अनुसंधान में उनकी भूमिका रही।

DSP से IPS और फिर DIG तक पहुंचा सफर

पुलिस सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद राकेश कुमार सिन्हा को 2012 बैच के IPS अधिकारी के रूप में पदोन्नति मिली। IPS अधिकारी बनने के बाद उन्होंने मद्य निषेध, विशेष शाखा, लोकायुक्त कार्यालय और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में SP/SSP स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

इसके बाद उन्हें DIG के पद पर पदोन्नति मिली और वर्तमान में वे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में DIG के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

पद और अधिकार के दुरुपयोग से जुड़े 32 मामलों के निष्पादन में अहम भूमिका

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में कार्य के दौरान उन्होंने AOPA यानी Abuse of Official Position and Authority—पद एवं अधिकार के दुरुपयोग से जुड़े मामलों के अनुसंधान एवं निष्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्तमान जिम्मेदारी के दौरान कम समय में 32 ऐसे मामलों के सफल निष्पादन का उल्लेखनीय कार्य उनके खाते में रहा। इन मामलों में सरकारी पद या अधिकार के कथित दुरुपयोग से जुड़े प्रकरणों की जांच की जाती है। ऐसे मामलों का समयबद्ध निष्पादन निगरानी जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

पंजाब और गुजरात में चुनावी जिम्मेदारी भी संभाली

पुलिस प्रशासन के साथ राकेश कुमार सिन्हा ने निर्वाचन संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभाईं। पंजाब और गुजरात में चुनाव के दौरान पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में उन्होंने सेवाएं दीं।

चुनाव जैसे संवेदनशील दायित्व में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यक्षमता को दर्शाती है।

सेवाकाल में मिले 32 प्रशस्ति-पत्र

राकेश कुमार सिन्हा के लंबे सेवाकाल में उत्कृष्ट कार्यों के लिए अब तक 32 प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। इनमें छह प्रशस्ति-पत्र बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से दिए गए हैं।

लगातार मिले प्रशस्ति-पत्र उनके कार्यों की गुणवत्ता और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय का सराहनीय सेवा पदक उनके सेवाकाल की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण सम्मान के रूप में जुड़ गया है।

दुमका से शुरू हुई यात्रा, बिहार के कई जिलों से होते हुए DIG तक पहुंची

राकेश कुमार सिन्हा की पुलिस सेवा यात्रा वर्ष 2001 में दुमका से शुरू हुई और बिहार के कई जिलों से होती हुई STF, ATS, विशेष शाखा, मद्य निषेध, लोकायुक्त कार्यालय और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंची।

इस दौरान उन्होंने अलग-अलग स्तर पर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, अनुसंधान, निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालीं। हर नई जिम्मेदारी के साथ उनके अनुभव का दायरा बढ़ता गया और पुलिस प्रशासन में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई।

करीब तीन दशक की इस सेवा यात्रा में 32 प्रशस्ति-पत्र और अब केंद्रीय गृह मंत्रालय का सराहनीय सेवा पदक—राकेश कुमार सिन्हा के लिए यह सम्मान केवल एक पदक नहीं, बल्कि लंबे सेवाकाल में निभाई गई जिम्मेदारियों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। NB18 की तरफ से ऐसे अधिकारी को सेल्यूट दिया जाता है।

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