खगड़ियाप्रदेश

जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने कहा….आजादी ने बदली तस्वीर, चाय बेचने वाले का बेटा PM, झाड़ू-पोछा करने वाले का बेटा डीएम बन सकता है

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खगड़िया/मानसी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर खगड़िया जिले के मानसी प्रखंड स्थित बलहा पंचायत के महादलित टोला पहुंचे जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने आजादी के मायने को बेहद सरल शब्दों में ग्रामीणों और अभिभावकों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि 1947 में देश आजाद हुआ तो इसका अर्थ केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति नहीं था, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना था जहां किसी व्यक्ति का भविष्य उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, योग्यता और शिक्षा से तय हो।

उन्होंने कहा कि आजादी से पहले राजा का बेटा राजा और जमींदार का बेटा जमींदार बनता था। लेकिन लोकतंत्र ने उस व्यवस्था को बदल दिया। आज चाय बेचने वाले का बेटा प्रधानमंत्री और झाड़ू-पोछा करने वाले का बेटा डीएम बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ने समाज के हर वर्ग के बच्चों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खोला है।

‘आजादी का मतलब है बराबरी का अधिकार’

विक्रम विरकर ने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ हर नागरिक को समान राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकार मिलना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रिक्शा चलाने वाले का एक वोट और बड़े उद्योगपति का एक वोट बराबर है। पुरुष और महिला के वोट का भी समान महत्व है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव या अन्याय होता है तो कानून के दायरे में उसके खिलाफ आवाज उठाना भी आजादी का हिस्सा है। लोकतंत्र में नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।

आर्थिक आत्मनिर्भरता के बिना आजादी अधूरी

जिलाधिकारी ने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों के साथ आर्थिक आजादी भी जरूरी है। हर व्यक्ति के पास भोजन हो, सिर पर छत हो और वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके—यही आर्थिक आजादी की दिशा है। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

‘बच्चा स्कूल नहीं जाएगा तो साहब कैसे बनेगा?’

महादलित टोला में अभिभावकों से संवाद करते हुए जिलाधिकारी ने बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चा स्कूल जाएगा, तभी अपने पैरों पर खड़ा होकर साहब बन सकता है। शिक्षा के जरिए बच्चा शिक्षक, अधिकारी, पुलिसकर्मी, सैनिक या किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकता है।

उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्कूल से दूर न रखें। कलक्टर ने कहा कि बच्चों को शिक्षा देना केवल उनका भविष्य संवारना नहीं, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों और अवसरों से जोड़ना भी है।

स्वतंत्रता दिवस पर बलहा पंचायत के महादलित टोला में जिलाधिकारी का संदेश स्पष्ट रहा—आजादी की असली ताकत बराबरी के अधिकार और शिक्षा से पैदा होने वाले अवसर में है। जब हर बच्चे को पढ़ने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, तभी 1947 की आजादी का सपना सही मायने में पूरा होगा।

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