विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर 10 दिन में कार्रवाई नहीं तो 11वें दिन CM कार्यालय से नोटिस, अधिकतम 30 दिन में समाधान का दावा
पटना। बिहार में विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए शुरू किए गए विद्यार्थी सहयोग पोर्टल की पहली बड़ी परीक्षा 25 अगस्त से शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने का दावा किया है। अब नजर इस बात पर होगी कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने के बाद सरकारी तंत्र तय समय के भीतर वास्तव में कितना सक्रिय होता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, विद्यार्थी की शिकायत पर यदि 10 दिनों के भीतर कार्रवाई शुरू नहीं होती है तो 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्वतः नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद 20वें और 25वें दिन भी निगरानी की व्यवस्था होगी और अधिकतम 30 दिनों के भीतर शिकायत के समाधान का लक्ष्य रखा गया है।
25 अगस्त को लगेगा पहला विद्यार्थी सहयोग शिविर
सरकार की योजना के अनुसार 25 अगस्त से स्कूलों, कॉलेजों और छात्रावासों में विद्यार्थी सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में विद्यार्थियों की समस्याओं और शिकायतों को दर्ज कर उनके समाधान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार ने बताया है कि विद्यार्थी अपनी शिकायतें ऑनलाइन भी दर्ज कर सकते हैं। शिकायतों के निस्तारण के लिए अलग-अलग स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की भी व्यवस्था बताई गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—30 दिन में कितनी शिकायतें होंगी हल?
नई व्यवस्था की घोषणा के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल इसकी जमीनी निगरानी को लेकर है। क्या शिकायत दर्ज होते ही विद्यार्थी को उसका ट्रैकिंग नंबर मिलेगा? क्या उसे यह पता चल पाएगा कि उसकी शिकायत किस अधिकारी के पास पहुंची? यदि 10 दिन तक कार्रवाई नहीं हुई तो क्या 11वें दिन स्वतः नोटिस जारी होगा?
और सबसे अहम सवाल—30 दिन की समय-सीमा पूरी होने तक कितने विद्यार्थियों की समस्या वास्तव में हल हो पाएगी?
यही आंकड़ा इस पूरी व्यवस्था की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना बनेगा।
पुराने मामलों से भी होगी व्यवस्था की परीक्षा
विद्यार्थियों की कई समस्याएं छात्रवृत्ति, प्रमाणपत्र, नामांकन, परीक्षा, रिजल्ट, छात्रावास, फीस और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ी होती हैं। ऐसे मामलों में केवल शिकायत दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थी को वास्तविक समाधान मिलना जरूरी है।
सरकार के अनुसार पहले आयोजित विद्यार्थी सहयोग शिविरों से प्राप्त 6.42 लाख आवेदनों में 96 प्रतिशत मामलों के निस्तारण का दावा किया गया है। अब नई डिजिटल व्यवस्था में शिकायतों की समय-सीमा और अधिकारियों की जवाबदेही को और स्पष्ट किया गया है।
News Bihar 18 की नजर रहेगी इन सवालों पर
25 अगस्त से शुरू होने वाले शिविरों के बाद यह देखा जाना जरूरी होगा कि—
• कितनी शिकायतें दर्ज हुईं?
• कितनी शिकायतों पर 10 दिन के भीतर कार्रवाई शुरू हुई?
• कितने मामलों में 11वें दिन स्वतः नोटिस जारी हुआ?
• कितनी शिकायतें 20 और 25 दिन तक लंबित रहीं?
• 30 दिन में कितने मामलों का वास्तविक समाधान हुआ?
• समाधान से असंतुष्ट विद्यार्थियों के लिए आगे क्या व्यवस्था है?
सरकार ने समयबद्ध समाधान का लक्ष्य तय कर दिया है। अब 25 अगस्त से शुरू होने वाला विद्यार्थी सहयोग अभियान इस दावे की पहली वास्तविक परीक्षा होगा। आने वाले दिनों में शिकायतों के आंकड़े यह तय करेंगे कि पोर्टल विद्यार्थियों के लिए वास्तव में राहत का माध्यम बनता है या शिकायत दर्ज करने की एक और व्यवस्था तक सीमित रहता है।

