गंगा, बूढ़ी गंडक और बागमती के बढ़ते पानी ने बढ़ाई चिंता; परबत्ता के निचले इलाकों में फिर पहुंचा पानी, फरकिया में संपर्क मार्ग प्रभावित
खगड़िया | 5 सितंबर। बिहार में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। खगड़िया में भी गंगा, बूढ़ी गंडक और बागमती के बढ़ते पानी ने प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के निचले इलाकों में पानी फिर फैलने लगा है। परबत्ता प्रखंड के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंचने की सूचना है।
सबसे ज्यादा चिंता उन गांवों को लेकर है जो नदियों के किनारे और निचले भूभाग में बसे हैं। जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी इन इलाकों में तेजी से असर डालती है। परबत्ता के कबेला पंचायत के जागृति टोला और तेमथा करारी पंचायत के शर्मा टोला में पानी पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। तीन दिन की मामूली राहत के बाद गंगा और बूढ़ी गंडक का पानी फिर बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ी है।
फरकिया में सड़क संपर्क पर असर
कोसी और बागमती के बढ़ते पानी का असर जिले के फरकिया इलाके में भी दिखाई दे रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में पानी फैलने और संपर्क मार्गों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इससे ग्रामीणों के सामने आवागमन, स्वास्थ्य सुविधा और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच की चुनौती खड़ी हो सकती है।
तीन नदियां बढ़ा रहीं दबाव
खगड़िया की भौगोलिक स्थिति पहले से ही संवेदनशील है। जिले को गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक और बागमती जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एक साथ कई नदियों का दबाव बढ़ना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।
राज्य में भी बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गंगा का जलस्तर कई स्थानों पर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और सरकार ने राहत-बचाव के लिए NDRF और SDRF की टीमें तथा बड़ी संख्या में नावें तैनात की हैं।
अब सवाल तैयारी का
बाढ़ हर साल आती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर साल की तरह इस बार भी प्रशासन पानी बढ़ने के बाद तैयारी करेगा?
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए नाव, सुरक्षित निकासी, पेयजल, दवा और राहत सामग्री की उपलब्धता सबसे जरूरी है। तटबंधों और संवेदनशील स्थानों की निगरानी भी लगातार होनी चाहिए।
क्योंकि खगड़िया में खतरा सिर्फ नदी के बढ़ते पानी का नहीं है। पानी बढ़ा तो सड़कें डूबेंगी, संपर्क टूटेगा और सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को होगी जो पहले से ही नदी और तटबंध के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं।
NB18 का सवाल
नदी का जलस्तर बढ़ना प्राकृतिक स्थिति है, लेकिन लोगों तक राहत पहुंचाने में देरी प्राकृतिक आपदा नहीं—प्रशासनिक चुनौती है।
अब देखना होगा कि जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में खगड़िया प्रशासन की तैयारी जमीन पर कितनी दिखाई देती है।

