बरसात में घुटने भर पानी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे, ग्रामीणों ने डीएम समेत वरीय अधिकारियों को भेजा आवेदन
ज्योतेन्द्र नारायण सिंह | चौथम
खगड़िया: जिले के चौथम प्रखंड अंतर्गत पश्चिमी बौरनय पंचायत के नौरंगा गांव स्थित साहूबासा कस्बे के करीब दो हजार लोगों को आजादी के दशकों बाद भी मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बना हुआ है। खासकर बरसात के दिनों में हालात गंभीर हो जाते हैं। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को घुटने भर पानी पार कर आवागमन करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात में जलजमाव के कारण बच्चों का स्कूल आना-जाना जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों ने दावा किया कि पिछले वर्ष पानी पार करने के दौरान डूबने से एक स्कूली बच्ची की मौत हो गई थी। इस घटना का जिक्र करते हुए ग्रामीणों ने आवागमन के सुरक्षित साधन की जरूरत पर जोर दिया है।
पगडंडी ही रास्ता, बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
साहूबासा के लोगों का कहना है कि मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए आज भी उन्हें पगडंडी से होकर गुजरना पड़ता है। सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश के दौरान रास्ते पर पानी भर जाने से परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। बच्चों को स्कूल पहुंचने में दिक्कत होती है, वहीं ग्रामीणों को भी जरूरी काम से बाहर निकलने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
दशकों से चली आ रही इस समस्या के कारण ग्रामीणों को हर साल बरसात में परेशानी झेलनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि सड़क का अभाव केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और गांव के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।
60 ग्रामीणों के हस्ताक्षर से डीएम को भेजा आवेदन
समस्या के समाधान की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंकित कुमार के नेतृत्व में करीब 60 ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन जिलाधिकारी सहित संबंधित विभागों के वरीय अधिकारियों को भेजा है। आवेदन के माध्यम से ग्रामीणों ने गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सकारात्मक पहल करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के जनप्रतिनिधियों के समक्ष इस महत्वपूर्ण समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि लंबे समय से परेशानी झेलने के बावजूद गांव की सड़क समस्या जस की तस बनी हुई है।
अब समाधान की उम्मीद में ग्रामीण
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल निरीक्षण कराने, सड़क निर्माण की संभावनाओं का आकलन करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी और संबंधित विभाग इस समस्या पर संज्ञान लेकर ठोस पहल करेंगे, ताकि साहूबासा के लोगों को पगडंडी के सहारे आवागमन की मजबूरी से मुक्ति मिल सके।
अब सवाल यह है कि करीब दो हजार लोगों की आबादी वाले इस इलाके को मुख्य सड़क से जोड़ने की पहल कब होगी और बच्चों को बरसात में पानी पार कर स्कूल जाने की मजबूरी से कब राहत मिलेगी?
