शराब हो या स्मैक, सप्लाई नेटवर्क की पहचान जरूरी; एसपी भानु प्रताप सिंह की सख्ती और सक्रिय पुलिसिंग से कार्रवाई की उम्मीद
NB18 | खगड़िया
बिहार में शराबबंदी लागू हुए एक दशक बीत चुका है, लेकिन अवैध शराब का कारोबार अब भी कानून-व्यवस्था के सामने चुनौती बना हुआ है। दूसरी ओर, स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। सवाल साफ है—शराब की अवैध आपूर्ति हो या सूखे नशे का कारोबार, इनकी जड़ तक पहुंचने और पूरे नेटवर्क की पहचान करने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है?
खगड़िया में भी इस मुद्दे पर पुलिस और प्रशासन की सक्रियता महत्वपूर्ण है। स्थानीय स्तर पर नशे से जुड़ी शिकायतों की जांच, संवेदनशील इलाकों में निगरानी और अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान जरूरी है। खासकर युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए केवल सेवन करने वालों तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय अवैध आपूर्ति के स्रोतों की जांच पर भी जोर देना होगा।
दस साल में करीब चार लाख लीटर शराब जब्त, फिर भी चुनौती बरकरार
एक रिपोर्ट के अनुसार, खगड़िया में अप्रैल 2016 से 19 अगस्त 2026 के बीच जिला पुलिस और उत्पाद पुलिस ने कुल 3,98,661 लीटर देसी-विदेशी शराब और बीयर जब्त की थी। रिपोर्ट में पिछले चार वर्षों के दौरान 12 हजार से अधिक लोगों के नशे की हालत में पकड़े जाने का भी उल्लेख है।
ये आंकड़े शराबबंदी लागू होने के बाद की कार्रवाई का पैमाना बताते हैं। हालांकि, जब्ती की मात्रा अपने आप में यह साबित नहीं करती कि अवैध कारोबार कितना बढ़ा या घटा है। इसके आकलन के लिए दर्ज मामलों, तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई और दोबारा अपराध करने वालों से जुड़े आंकड़ों का भी विश्लेषण जरूरी है।
सूखे नशे की सप्लाई चेन की जांच भी जरूरी
शराब के साथ-साथ स्मैक और अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर भी ध्यान देना होगा। अप्रैल में खगड़िया पुलिस ने चौथम थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद की थी। दो आरोपितों की गिरफ्तारी और आपूर्ति के स्रोतों तथा आगे के नेटवर्क की जांच का भी उल्लेख था।
ऐसे मामलों में केवल खेप बरामद करना ही पर्याप्त नहीं है। जांच के दौरान यह पता लगाना भी जरूरी है कि प्रतिबंधित पदार्थ कहां से आया, उसे कहां पहुंचाया जाना था और कारोबार में किन लोगों की भूमिका थी। साक्ष्य मिलने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
एसपी भानु प्रताप सिंह से सख्त कार्रवाई की उम्मीद
खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह ने थानों के औचक निरीक्षण के दौरान अपराध नियंत्रण, नियमित गश्ती, शिकायतों के त्वरित निष्पादन और शराब तस्करी पर सख्ती के निर्देश दिए हैं।
इन निर्देशों के मद्देनजर उम्मीद है कि जिले में शराब और सूखे नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जाएगा। विशेष रूप से उन मामलों में, जहां संगठित आपूर्ति नेटवर्क की आशंका हो, पुलिस को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कड़ियां जोड़ने पर ध्यान देना चाहिए।
अब देखना होगा कि अवैध शराब के कारोबार और मादक पदार्थों की आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों पर पुलिस किस तरह की कार्रवाई करती है। नियमित गश्ती, विश्वसनीय सूचना पर जांच और तस्करी के नेटवर्क की पहचान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
नागरिक भी दें गोपनीय सूचना
अवैध शराब की बिक्री या नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी रखने वाले नागरिक संबंधित पुलिस अधिकारी या प्रशासन के अधिकृत शिकायत माध्यम से सूचना दे सकते हैं। पहचान को लेकर चिंता होने पर शिकायत करते समय गोपनीयता बनाए रखने का अनुरोध किया जा सकता है।
प्रशासन को ऐसी सूचनाओं का सत्यापन कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। नागरिकों को स्वयं संदिग्ध लोगों से भिड़ने या बिना प्रमाण किसी पर आरोप लगाने से बचना चाहिए।
शराबबंदी का उद्देश्य तभी प्रभावी होगा, जब अवैध आपूर्ति पर नियंत्रण के साथ कानून का निष्पक्ष पालन भी सुनिश्चित हो। इसी तरह सूखे नशे के मामले में युवाओं को जागरूक करने, जरूरतमंदों को उपचार उपलब्ध कराने और अवैध कारोबार की जांच करने की जरूरत है।
NB18 की अपेक्षा है कि एसपी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस शराब तस्करी और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की पहचान के लिए प्रभावी कदम उठाएगी। कार्रवाई का लक्ष्य केवल बरामदगी तक सीमित न रहे, बल्कि जांच में सामने आने वाले दोषियों को कानून के दायरे में लाने पर भी जोर हो।
