4,487 वोट लेकर राजद के डॉ. संजीव कुमार बने विजेता; भाजपा के नवल किशोर यादव को मिले 3,430 मत। 1,057 वोटों से जीत ने बदला पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का सियासी समीकरण। पिता की राजनीतिक विरासत से लेकर दल बदल और चुनावी वापसी तक, चर्चा में डॉ. संजीव का सफर।
पटना | NEWS BIHAR 18
बिहार की शिक्षक राजनीति में ऐसा उलटफेर हुआ है, जिसने दशकों से कायम चुनावी समीकरण को बदल दिया। पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से पराजित कर दिया। अंतिम मतगणना में डॉ. संजीव को 4,487 वोट मिले, जबकि नवल किशोर यादव 3,430 वोटों पर रह गए। जनसुराज की डॉ. दिव्या ज्योति तीसरे स्थान पर रहीं। इस परिणाम के साथ नवल किशोर यादव की लगातार पांच चुनावी जीत का सिलसिला टूट गया। करीब तीन दशक से इस सीट पर उनका प्रभाव रहा था।
यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतगणना के शुरुआती दौर में भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए थे। लेकिन अंतिम नतीजे ने तस्वीर बदल दी। शिक्षक मतदाताओं के बीच हुए इस मुकाबले में डॉ. संजीव की जीत ने उन्हें बिहार की विधान परिषद की राजनीति में नई पहचान दिलाई है।
पिता मंत्री, बेटों की राजनीति और अब विधान परिषद में नई कहानी
डॉ. संजीव कुमार की राजनीतिक पृष्ठभूमि खगड़िया जिले की परबत्ता विधानसभा सीट से जुड़ी है। उनके पिता स्वर्गीय आरएन सिंह परबत्ता से विधायक रहे थे और बिहार सरकार में मंत्री भी बने थे। उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिना जाता था।
पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले परिवार में डॉ. संजीव के भाई राजीव कुमार भी विधान परिषद के सदस्य हैं। डॉ. संजीव की जीत के बाद दोनों सगे भाई विधान परिषद में अपनी-अपनी राजनीतिक भूमिका निभाएंगे। हालांकि, दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े हैं।
जदयू से राजद तक: हार के बाद चुनावी वापसी
डॉ. संजीव कुमार पहले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में थे। बाद में उन्होंने राजद का रुख किया और परबत्ता विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। विधानसभा चुनाव की हार के बाद पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मिली सफलता उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण मोड़ बन गई।
इस जीत ने उन्हें दोबारा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब उनकी भूमिका केवल एक विजेता प्रत्याशी की नहीं, बल्कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि की भी होगी।
शुरुआती बढ़त भाजपा की, लेकिन अंतिम बाजी राजद के हाथ
मतगणना के दौरान मुकाबला लगातार दिलचस्प बना रहा। एक चरण में नवल किशोर यादव 3,199 वोटों के साथ आगे थे, जबकि डॉ. संजीव कुमार को 3,149 वोट मिले थे। तब भाजपा प्रत्याशी 50 मतों से आगे चल रहे थे। लेकिन अंतिम नतीजों में डॉ. संजीव ने 4,487 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
चुनाव के प्रमुख आंकड़े
– विजेता: डॉ. संजीव कुमार — राजद
– विजेता के वोट: 4,487
– दूसरे स्थान पर: नवल किशोर यादव — भाजपा
– दूसरे प्रत्याशी के वोट: 3,430
– जीत का अंतर: 1,057 वोट
– तीसरे स्थान पर: डॉ. दिव्या ज्योति — जनसुराज
जीत के बाद सबसे बड़ी चुनौती: शिक्षकों की उम्मीदें
चुनाव में जीत दर्ज करना एक पड़ाव है, लेकिन अब डॉ. संजीव कुमार के सामने शिक्षकों की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी होगी। सेवा शर्तें, वेतन, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल उनके कामकाज की प्रमुख कसौटी बन सकते हैं।
इस नतीजे को केवल किसी दल की जीत या हार के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि शिक्षक मतदाताओं की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए नए प्रतिनिधि कितनी पहल करते हैं।
NB18 विश्लेषण: परबत्ता की राजनीति से पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र तक पहुंचे डॉ. संजीव कुमार ने चुनावी हार के बाद वापसी की है। उनके पिता की राजनीतिक विरासत, जदयू से राजद तक का सफर और नवल किशोर यादव के लंबे चुनावी वर्चस्व का अंत—इन तीनों पहलुओं ने इस जीत को बिहार की राजनीति की प्रमुख खबर बना दिया है। अब असली परीक्षा शिक्षकों के हितों के लिए उनके कामकाज की होगी।
NEWS BIHAR 18 | खबरें जो सच दिखाए।
