पटना | NB18
मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। साथ ही बिहार पुलिस को इस हत्याकांड की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी।
जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे परिजन
दुलारचंद यादव के परिजनों की ओर से अनंत सिंह की जमानत को चुनौती दी गई थी। उनका पक्ष था कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए जमानत दिए जाने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी दुलारचंद यादव की मौत
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है। इस घटनाक्रम में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में अनंत सिंह को आरोपी बनाया था। उन्हें 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आए थे।
अब 1 दिसंबर पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। वहीं पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करनी है। अदालत के इस फैसले के बाद मोकामा की राजनीति में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अनंत सिंह के लिए यह घटनाक्रम कानूनी और राजनीतिक, दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। अब सबकी निगाहें 1 दिसंबर की समय-सीमा और पुलिस की आगे की जांच पर टिकी हैं।
